Breast cancer in hindi |कारण, लक्षण और बचाव

Breast cancer in hindi

Breast cancer in hindi – Breast (स्तन) कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसके बारे में हम आए दिन सुनते हैं. भारत में पिछले कुछ समय में तेजी से महिलाएं इस बीमारी का शिकांर हुई हैं. देश में हर आठ में से एक महिला इसकी चपेट में है. समय से इलाज ना मिलने पर ये एक जानलेवा बीमारी बन जाती है. चलिए जानते हैं स्तन कैंसर क्या होता है, कैसे होता है, क्या हैं इसके लक्षण है और कैसे करें बचाव.

स्तन कैंसर क्या है|Breast cancer in hindi

Breast cancer (स्तन कैंसर) स्तन की कोशिकाओं में शुरू होने वाला एक ट्यूमर है (जो शरीर के अन्य उत्तकों एवं बाकी हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है।) यह महिलाओं एवं पुरूषों दोनों में हो सकता है; हालांकि पुरूषों में यह दुर्लभ ही मिलता है। शरीर के किसी अंग में होने वाली कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्ध‍ि कैंसर का प्रमुख कारण होती है। शरीर की आवश्यकता अनुसार यह कोशि‍काएं बंट जाती है, लेकिन जब यह लगातार वृद्धि करती हैं तो कैंसर का रूप ले लेती हैं। इसी प्रकार स्तन कोशिकाओं में होने वाली अनियंत्रित वृद्ध‍ि, स्तन कैंसर का मुख्य कारण है। कोशिकाओं में होने वाली लगातार वृद्धि एकत्र होकर गांठ का रूप ले लेती है, जिसे कैंसर ट्यूमर कहते हैं।

कैसे होता है स्तन कैंसर |Breast cancer in hindi

स्तन कैंसर (Breast Cancer) के बारे में जानने के लिए शरीर रचना के बारे में जानना बहुत जरूरी है. स्तन शरीर का एक अहम अंग है जिसका मुख्य कार्य अपने दुग्ध उत्पादक ऊतकों (टिश्यू) के माध्यम से दूध (Breast Milk) बनाना है. ये टिश्यू (Breast tissues) सूक्ष्म वाहिनियों (डक्ट) के जरिये निप्पल से जुड़े होते हैं. इसके अलावा इनके चारों ओर कुछ अन्य टिश्यू, फाइब्रस मैटेरियल, फैट, नाड़ियां, रक्त वाहिकाएं और कुछ लिंफेटिक चैनल होते हैं, जो स्तन की संरचना को पूरा करते हैं. यहां यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर स्तन कैंसर डक्ट में छोटे कैल्शिफिकेशन (सख्त कण) के जमने से या स्तन के टिश्यू में छोटी गांठ (Lump in Breast) के रूप में बनते हैं और फिर बढ़कर कैंसर में ढलने लगते हैं. इसका प्रसार लिंफोटिक चैनल या रक्त प्रवाह के जरिये अन्य अंगों की ओर हो सकता है.

क्या हैं कारण|Breast cancer in hindi

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार Breast cancer (स्तन कैंसर) के निम्नलिखित कारण हैं :-

  1. बच्चे नहीं पैदा करना.
  2. अधि‍क उम्र में पहला बच्चा होना.
  3. स्‍तनपान नहीं कराना.
  4. माहवारी का कम उम्र में ही शुरू होना.
  5. रजोनिवृत्ति (मैनोपॉज) देर से होना.
  6. वजन में अत्यधिक वृद्धि.
  7. अक्सर शराब का सेवन करना.
  8. खराब व अनियंत्रित जीवनशैली.
  9. मोटापा और हार्मोन से संबंधित दवाएं.
  10. इसके अलावा अनुवांशि‍क रूप से भी स्तन कैंसर की बीमारी होना संभव है।

क्या हैं लक्षण|Breast cancer in hindi

यदि स्तन कैंसर के लक्षणों को हम जान लें तो इसे शुरुआत में ही रोका जा सकता है, नीचे दिए गए स्तन कैंसर के कुछ प्रमुख लक्षण हैं :-

  1. किसी स्तन में या बाहों के नीचे गांठ.
  2. किसी स्तन के आकार, आकृति या ऊंचाई में अचानक कोई बदलाव दिखना.
  3. स्तन या निप्पल का लाल हो जाना.
  4. स्तन से साफ या खून जैसे द्रव का बहना.
  5. स्तन के टिश्यू या त्वचा का ज्यादा समय तक सख्त बने रहना.
  6. स्तन या निप्पल की त्वचा पर कुछ अलग दिखना या अनुभव होना (डिंपल दिखना, जलन होना, लकीरें दिखना या सिकुड़न अनुभव होना).
  7. स्तन का कोई हिस्सा बाकी हिस्सों से अलग दिखाई देना.
  8. स्तन की त्वचा के नीचे कहीं सख्त अनुभव होना.
  9. निप्पल अंदर की तरफ रहना और तरल पदार्थ आना या पपड़ी बनना.
  10. स्तन पर चकत्ते या सूजन आना.
  11. स्तन को दबाने पर दर्द होना.
  12. स्तन की त्वचा पर कोई फोड़ा या अल्सर जो ठीक न होता हो।

बचाव के उपाय |Breast cancer in hindi

  1. नियमित तौर पर एक्सरसाईज और योगा करें.
  2. नमक का अत्यधिक सेवन न करें.
  3. रेड मीट के अधि‍क सेवन से बचें.
  4. सूर्य की तेज किरणों के प्रभाव से बचें.
  5. अधिक मात्रा में धूम्रपान और नशीले पदार्थों का सेवन न करें।(कैसे छोड़ें नशे की लत)
  6. गर्भनिरोधक गोलियों का लगातार सेवन करने से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।

इन बातों का ध्यान रखकर स्तर कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ अन्य घरेलू उपाय हैं जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल कर आप स्तर कैंसर के खतरे से बच सकते हैं।  

  1. नियमित रूप से काली चाय का सेवन करना स्तन कैंसर से आपकी रक्षा करता है। इसके प्रमुख कारण इसमें पाया जाने वाला एपिगैलो कैटेचिन गैलेट नामक तत्व है, जो ट्यूमर की कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्ध‍ि को रोकने में मदद करता है।
  2. ग्रीन टी का सेवन भी स्तन कैंसर से रक्षा करने में सहायक है। इसमें पाए जाने वाले एंटी-इन्फ्लैमेटरी गुण स्तन कैंसर को बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं।
  3. चाय को अत्यधिक गर्म करके पीना भी स्तन कैंसर का कारण हो सकता है, क्योंकि गर्म तापमान कैंसर कोशिकाओं में वृद्धि करते हैं। ऐसे में हल्की गर्म चाय का ही सेवन करें।
  4. विटामिन डी का सेवन कैंसर कोशि‍काओं की वृद्धि रोकने में सहायक है। इसके लिए दूध व दही का सेवन करना फायदेमंद होता है।
  5. विटामिन सी भी आपको स्तन कैंसर से बचाता है। यह आपके प्रतिरक्षी तंत्र को मजबूत करके कैंसर कोशि‍काओं को बढ़ने से रोकता है।
  6. कैंसर कोशि‍काओं की वृद्ध‍ि रोकने के लिए गेहूं के जवारे भी बेहद कारगर उपाय है। यह न केवल हानिकारक पदार्थों का बाहर निकालने में सहायक है बल्कि आपके प्रतिरक्षी तंत्र को भी मजबूत करते हैं। इसका जूस पीना फायदेमंद है।
  7. हर रोज़ अंगूर या अनार का जूस पीने से कैंसर से बचाव होता है.
  8. प्रतिदिन लहसुन का सेवन करने से स्तन कैंसर की संभावनाओं को रोका जा सकता है.
  9. नमक, सोंठ, शमी, मूली, सरसों और सहिजन के बीज सममात्रा में लेकर खट्टे छाछ में पीसकर स्तनों पर लेप करें. एक घंटे के बाद नमक की पोटली से 10-15 मिनट तक सेंक करें.
  10. पोई के पत्तों को पीसकर पिण्ड बनाकर लेप करने तथा पत्तों द्वारा अच्छी तरह ढंककर पट्टी बांधने से शुरुआती अवस्था का स्तन कैंसर अच्छा हो जाता है.
  11. एक ग्लास पानी में हर्बल ग्रीन टी को आधा होने तक उबालें और फिर पीएं.

Breast cancer स्तन कैंसर आज के समय में एक बेहद खतरनाक बीमारी बनकर उभरा है. उस पर हमारी बदलती जीवन-शैली ने स्तन कैंसर का खतरा और बढ़ा दिया है। आम तौर पर स्तन कैंसर 45 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को होता था, लेकिन अस्वास्थ्यकर जीवन-शैली के चलते आज यह उम्र घटकर लगभग 25 से 30 साल तक हो गई है। लिहाजा 20 से 39 वर्ष की आयु की महिलाएं प्रत्येक तीन वर्ष में और 40 वर्ष की आयु के बाद हर वर्ष विशेषज्ञ से परीक्षण राएं । डॉक्टर के परामर्श पर 40 वर्ष की आयु के बाद मैमोग्राफी (डिजिटल/ अल्ट्रासोनिक मैमोग्राफी अवश्य कराएं।

स्तन कैंसर में होती है ये जांच |Breast cancer in hindi

बॉयोप्सी करने के बाद अल्ट्रासाउंड, सी.टी स्कैन,बोन स्कैन, पेट (पीईटी) स्कैन द्वारा कैंसर के फैलाव का पता करते हैं।

स्तन कैंसर का इलाज |Breast cancer in hindi

कैंसर का इलाज इस मर्ज की अवस्था के अनुसार सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी से मिला-जुलाकर किया जाता है।

हार्मोनल थेरेपी:- इसमें कैंसर कोशिकाओं पर कुछ रिसेप्टर्स होते हैं। जैसे ‘ई आर’ और ‘पी आर’, जिसकी जांच बॉयोप्सी के दौरान कर लेनी चाहिए। हार्मोनल थेरेपी इन्हीं रिसेप्टर्स (जिनके कारण कैंसर फैलता है) के विरुद्ध काम करती है।

टार्गेटेड थेरेपी:– टार्गेटेड थेरेपी का कीमोथेरेपी की तरह साइड इफेक्ट नहीं होता। यह थेरेपी सिर्फ कैंसर ग्रस्त भाग के समीप वाली स्वस्थ कोशिकाओं या टिश्यूज पर खराब प्रभाव नहीं डालती है।

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