About Typhoid in hindi|5 EASY आर्युवेदिक

About Typhoid in hindi

About Typhoid in hindi– Typhoid(टाइफाइड) एक संक्रामक बीमारी है जोकि साल्मोनेला टाइफीमुरियम(Salmonella Typhimurium) बैक्टीरिया से संक्रमित खाने,पीने की चीजों के सेवन से होती है या अगर कोई व्यक्ति साल्मोनेला टाइफिमुरियम(Salmonella Typhimurium) से ग्रसित है तो उसके साथ खाने-पीने, नजदीकी से बात करने से भी फैलती है. साल्मोनेला टाइफीमुरियम बैक्टीरिया को साल्मोनेला टाइफी भी कहते हैं.

यह बीमारी जानवरों के द्वारा संक्रमित नहीं होती है. यह सिर्फ और सिर्फ इंसानों के बीच संक्रमित होती है.

अगर इस Typhoid(टाइफाइड) बुखार का समय पर इलाज ना किया जाए तो यह कुछ दिनों में खतरनाक साबित हो सकता है. अगर इसका इलाज ना किया जाए तो जो पांच व्यक्ति इससे ग्रसित हैं उनमें से एक व्यक्ति के लिए यह घातक हो सकता है. वहीं अगर समय पर इलाज किया जाए तो यह 100 में से सिर्फ 4 लोगों के लिए घातक हो सकता है. भारत में यह आम तौर पर होता है और विशेष तौर पर ये बच्चों को ज्यादातर होता है जिसे हम मोतीझरा या मियादी बुखार(आंत ज्वर)कहते हैं.

Typhoid(टाइफाइड) कैसे फैलता है:- (About Typhoid in hindi)

साल्मोनेला टाइफी जीवाणु(Salmonella typhimurium bacteria ) हमारे अन्दर मुंह से प्रवेश करता है और यह एक से तीन सप्ताह तक हमारी आंतों में रहता है उसके बाद यह आंत की दीवारों के माध्यम से हमारे रक्त प्रवाह में मिल जाता है और रक्त प्रवाह में आने के बाद हमारे शरीर के अन्य तन्तुओं तक पहुंच जाता है. अगर व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता प्रबल है तो इसे कुछ हद तक रोका जा सकता है क्योंकि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली साल्मोनेला टाइफी से नहीं लड़ सकती. यह जीवाणु हमारी कोशिकाओं बिना प्रतिरक्षा या प्रतिरोधक प्रणाली से प्रभावित हुए सुरक्षित रह सकता है.

अगर कोई व्यक्ति Typhoid(टाइफाइड) से ग्रसित है और उसने मल त्याग करने के बाद अच्छे से हाथ नहीं धोये और कोई खाने-पीने की वस्तु को छूता है और फिर दूसरा व्यक्ति उस वस्तु को खा लेता है तो निश्चित ही Typhoid(टाइफाइड) दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाएगा.

Typhoid(टाइफाइड) के लक्षण:- (About Typhoid in hindi)

Typhoid(टाइफाइड) के लक्षण आमतौर पर 1 से 3 सप्ताह में दिखने लगते हैं यदि आपके अन्दर साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया प्रवेश कर गया है.

इसके दो मुख्य लक्षण हैं :-

  1. बुखार
  2. शरीर पर दाने

Typhoid(टाइफाइड) का बुखार ज्यादातर तेज ही होता है जोकि 104 डिग्री तक चला जाता है. शरीर पर दाने जरूरी नहीं कि सभी को हों और यदि होते हैं तो गुलाबी रंग के गर्दन या पेट के आसपास होंगे. Typhoid(टाइफाइड) की पहचान रक्त, मल, पेशाव, आदि की जांच में साल्मोनेला टाइफी की उपस्थिति से होती है.

Typhoid(टाइफाइड) के लक्षण में ये भी शामिल हैं:-

  1. कमजोरी
  2. पेट दर्द
  3. कब्ज़
  4. सिरदर्द

इस बीमारी की खास बात यह है कि ना तो यह एक दिन में शुरु होती है और ना ही यह एक दिन में ठीक होती है. एक से दो सप्ताह अच्छा महसूस करने के बाद लगभग 10 फीसदी लोगों में इस बीमारी के लक्षण फिर से दिखने लगते हैं. ज्यादातर यह बीमारी तीन से चार सप्ताह में ठीक होने लगती है. जो लोग एंटीबायोटिक्स से ठीक होते हैं उनमें इस बीमारी के दोबारा होने की संभावना अधिक होती है.

Typhoid(टाइफाइड) बुखार के कारण :- (About Typhoid in hindi)

  1. साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से संक्रमित व्यक्ति यदि मल त्यागने और पेशाव करने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह साफ नहीं करता है और उन्हीं हाथों से कोई खाने-पीने की चीज को छूता है जिसे कोई दूसरा व्यक्ति खा लेता है तो दूसरे व्यक्ति को निश्चित ही Typhoid(टाइफाइड) बुखार होने का खतरा हो जाता है. बैक्टीरिया से दूषित शौंचालय के प्रयोग करने के बाद यदि बिना अच्छे से हाथ साफ किए मुंह को छूने से बैक्टीरिया मुंह में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं.
  2. यदि संक्रमित व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान पर तालाब, नदी या घाट में मल-मूत्र त्यागने के बाद हाथ धोता है तो सारा पानी दूषित हो जाता है और उसी पानी को यदि किसी भी तरह से खाने-पीने की चीजों में इस्तेमाल किया जाए तो संक्रमण निश्चित ही फैलना शुरु हो जाता है.
  3. साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से ग्रसित व्यक्ति के साथ ओरल सेक्स या एनल सेक्स करने से भी Typhoid(टाइफाइड) फैलता है.
  4. हरि सब्जियों को कच्चा खाने से भी Typhoid(टाइफाइड) हो सकता है क्योंकि हो सकता है जिस खेत में सब्जियां उगाई गई हों उसमें संक्रमित व्यक्ति के मल से युक्त खाद का प्रयोग किया गया हो.
  5. अगर बिना इलाज के तीन से चार सप्ताह में व्यक्ति ठीक हो जाता है तब भी 20 में से एक व्यक्ति में बैक्टीरिया रहता है जोकि संक्रमण का कारण बन सकता है.
  6. संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है.
  7. संक्रमित व्यक्ति या बच्चे को चूमने से इसका बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाता है.

Typhoid(टाइफाइड) बुखार का इलाज :- (About Typhoid in hindi)

  1. Typhoid(टाइफाइड) का एक ही प्रभावशाली इलाज है एंटीबायोटिक्स. इन दवाओं में Ciprofloxacin (गर्भवती महिलाओं के लिए नहीं) और Ceftriaxone.  इन दवाओं के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं. इसके अलावा व्यक्ति के लिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा पानी पियें.
  2. यदि प्रारंभ में इसका इलाज नहीं किया गया तो यह अवस्था आ सकती है कि आंत में छेद हो जाएं तो Typhoid(टाइफाइड) को ऑपरेशन के द्वारा ठीक किया जाता है

Typhoid(टाइफाइड) से बचाव के उपाय (About Typhoid in hindi)

Typhoid(टाइफाइड) से बचाव के लिए टीकाकरण(Vaccination) को ही सबसे बेहतर विकल्प माना गया है. यदि आप किसी ऐसे क्षेत्र में यात्रा करने जा रहे हैं जहां Typhoid(टाइफाइड) के जोखिम अधिक हैं तो आपको Typhoid(टाइफाइड) का टीका लगवाने का सुझाव दिया जा सकता है.

वैक्सीन(Vaccine)

Typhoid(टाइफाइड) के लिए दो वैक्सीन उपलब्ध हैं:-

  1. यात्रा करने से कम से कम एक हफ्ता पहले एक इंजेक्शन(टीकाकरण) लगवाना.
  2. यात्रा के दौरान 4 कैप्सूल खाना, जो हर दूसरे दिन में एक खाया जाता है.

हालांकि टीकाकरण भी 100 फीसदी काम नहीं कर पाता है. दोनों प्रकार का टीकाकरण बार-बार करवाने की जरूरत पड़ती है क्योंकि समय के साथ-साथ इनका असर खत्म हो जाता है.

Typhoid(टाइफाइड) से बचाव के लिए कुछ अन्य उपाय भी कर सकते हैं जो निम्नलिखित हैं:-

  1. अच्छे से हाथ धोएं– गर्म पानी व साबुन के साथ बार-बार हाथ धोना संक्रमण से बचाव के लिए सबसे बेहतर तरीका है. खाना बनाने व खाने से पहले और टॉयलेट के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं. अपने साथ एल्कोहल वाले सेनिटाइजर्स रखें और जहां पानी उपलब्ध ना हो इनका उपयोग करें.
  2. साफ पानी पिएं– दूषित पानी वाले इलाकों में टाइफाइड की समस्या का खतरा अधिक होता है. इसलिए हमेशा बोतल या कैन आदि में बंद पानी या अन्य पेय पदार्थ ही पीने चाहिए. पीने वाले पानी में बर्फ ना मिलाएं. दांतों को ब्रश करने के लिए भी बोतल वाले पानी का इस्तेमाल करें और नहाते समय पानी मुंह के अंदर ना जाने दें.
  3. कच्चे फल व सब्जियां ना खाएं– बाजार में आने वाली सब्जियां व फलों को गंदे पानी में धोया जा सकता है. लिहाजा कच्ची सब्जियां खाने से बचें. वहीं फल भी सुरक्षित साफ पानी में धोकर खाएं. बिना पके खाद्य पदार्थ खाने से परहेज़ करें.
  4. ताजा खाना खाएं– बासी खाना ना खाएं. जितना हो सके गर्म और ताजा पका खाना ही खाएं. सड़क किनारे मिलने वाले भोजन से बचें क्योंकि इनके दूषित होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है.
  5. अन्य लोगों को संक्रमित ना करें– यदि आप टाइफाइड बुखार से ठीक हो रहे हैं तो कुछ उपाय की मदद से अन्य लोगों को भी आप संक्रमित होने से बचा सकते हैं. उन उपायों को अपनाएं.
  6. एंटीबायोटिक दवाएं लें– डॉक्टर के बताए अनुसार अपनी एंटीबायोटिक दवाओं को समय पर लेते रहें. यदि आप इलाज पूरा होने से पहले ही खुद को स्वस्थ महसूस कर रहे हैं तब भी दवाएं बीच में ना छोड़ें. अपना कोर्स पूरा करें.
  7. खुद से खाना ना बनाएं– टाइफाइड से संक्रमित व्यक्ति को खुद से खाना नहीं बनाना चाहिए. यदि आप किसी फूड इंडस्ट्री या स्वास्थ्य देखभाल सेवा में काम कर रहे हैं तो आपको तब तक काम पर नहीं जाना चाहिए जब तक आप पूरी तरह संक्रमित रहित ना हो जाएं.

Typhoid(टाइफाइड) से बचाव के आर्युवेदिक उपाय (About Typhoid in hindi)

  1. ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थों का सेवन करें-टाइफाइड के कारण अक्सर डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है. इसलिए रोगी को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए. इसमें पानी, ताजे फलों का जूस, हर्बल चाय आदि हो सकते हैं. स्वस्थ और रोग मुक्त जीवन के लिए शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखें.
  2. लहसुन– लहसुन में कई सारे एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं. इसे विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है. टाइफाइड बुखार को कंट्रोल करने में भी यह बेहद सहायक साबित हो सकता है. लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं और यह रक्त को साफ करने में मदद करता है. इसका अधिक लाभ लेने के लिए इसे कच्चा या अधपका खाना चाहिए. यह टाइफाइड बुखार से पीड़ित व्यक्ति की प्रतिरक्षा को बढ़ाता है,
  3. तुलसी– तुलसी कई सारे चमत्कारिक गुणों से युक्त एक लोकप्रिय जड़ीबूटी है. यह टाइफाइड बुखार की वजह से आने वाली सूजन और ज्वाइंट पेन को कम करने में मदद करती है. इसका इस्तेमाल कई आर्युवेदिक दवाओं में भी किया जाता है. टाइफाइड से पीड़ित व्यक्ति को तुलसी डालकर उबला हुआ पानी देने से फायदा होता है.जल्दी राहत के लिए अदरक का रस या काली मिर्च के पाउडर में तुलसी का रस मिलाकर रोगी को दें. तुलसी के जीवाणुरोधी गुण बैक्टीरिया को हटाने में मदद करते हैं.
  4. सेब का सिरका– Typhoid(टाइफाइड) के लिए सेब का सिरका काफी फायदेमंद है. सेब के सिरके में अम्लीय गुण होते हैं. यह हाई फीवर को कम करता है क्योंकि यह टाइफाइड से पीड़ित व्यक्ति के शरीर से गर्मी निकालता है.
  5. ठंडे पानी की पट्टियां– टाइफाइड पीड़ित व्यक्ति को हाई फीवर रहता है जो कई दिनों तक बना रहता है. इसलिए रोगी के शरीर के तापमान को सामान्य रखने के लिए ठंडे पानी की पट्टियों का इस्तेमाल करें. रोगी के माथे, पैर और हाथों पर ठंडे पानी की पट्टियां रखते रहें. इससे पीड़ित को काफी फायदा मिलेगा.

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