Kidney stone symptoms in hindi

(Kidney stone symptoms in hindi)
(Kidney stone symptoms in hindi)

Kidney stone symptoms in hindiKidney stone(गुर्दे की पथरी) की समस्या आज के समय में काफी आम हो गई है. आधुनिक जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के चलते तेजी से लोग इस समस्या का शिकार हो रहे हैं. वैसे तो पथरी शरीर में कहीं भी हो सकती है लेकिन गुर्दे(Kidney) और पित्त की थैली(Gallbladder) की पथरी सबसे ज्यादा होती है. आज हम बात करेंगे गुर्दे की पथरी की.

क्या है गुर्दे की पथरी(Kidney stone)|Kidney stone symptoms in hindi

Kidney stone (गुर्दे की पथरी) को Renal calculi (रेनल केलकुलि) भी बोलते हैं. यह मिनरल्स और नमक से बनी ठोस जमावट है. आम तौर पर यह गुर्दे में उत्पन्न होती है. हालांकि यह आपके मूत्र पथ(Urinary tract) में कहीं भी विकसित हो सकती है. मूत्र पथ में गुर्दे(Kidneys), मूत्रवाहिनी(Ureter), मूत्राशय(Bladder), और मूत्रमार्ग(Urethra) होते हैं. यह रेत के दाने से लेकर गोल्फ की गेंद जितनी बड़ी भी हो सकती है. गुर्दे की पथरी मूत्र पथ के माध्यम से आपके शरीर से बाहर भी निकल सकती है. गुर्दे में पथरी होने पर तेज दर्द का सामना करना पड़ सकता है. गुर्दे की पथरी(Kidney stone) सबसे दर्दनाक चिकित्सक अवस्था में से एक है. इसका समय पर इलाज ना किया जाए तो ये गुर्दे में गंभीर संक्रमण का खतरा बन सकती है. आपकी किडनी खराब भी हो सकती है. महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में गुर्दे की पथरी(Kidney stone) के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं.(Kidney stone symptoms in hindi)

गुर्दे में पथरी (Kidney stone) का कारण पथरी के प्रकार पर निर्भर करता है. गुर्दे की पथरी (Kidney stone) चार तरह की होती हैं:-

  1. Calcium stone(कैल्शियम स्टोन)– यह किडनी स्टोन यानि गुर्दे की पथरी का सबसे आम प्रकार है. यह ज्यादातर कैल्शियम ऑक्सलेट(Calcium oxalate) से बने होते हैं. हालांकि यह कैल्शियम फोस्फेट(Calcium phosphate) या maleate(मेलिएट) से भी बने हो सकते हैं. कम ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थ खाने से इस प्रकार की पथरी के खतरे को कम किया जा सकता है. जिन खाद्य पदार्थों में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है उनमें आलू के चिप्स, मूंगफली, चॉकलेट, चुकंदर और पालक शामिल है. लिहाजा इन सब चीजों का सेवन कम करें.
  2. Uric acid stone(यूरिक एसिड स्टोन)– इस प्रकार के किडनी स्टोन(गुर्दे की पथरी) महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्यादा आम है. इसके ज्यादातर उन लोगों में होने की संभावना होती है जो गाउट की समस्या से पीड़ित हैं या फिर किमोथेरेपी से गुजर रहे हैं. इस प्रकार की पथरी तब होती है जब मूत्र में एसिड की मात्रा बहुत अधिक होती है. प्यूरीन से समृद्ध आहार मूत्र में एसिड के स्तर को बढ़ा सकते हैं. प्यूरीन(एक प्रकार का बेरंग पदार्थ) जो पशु प्रोटीन में मौजूद होता है जैसे मछली, शेलफिश और मांस. लिहाजा इन चीजों का सेवन ना करें.
  3. Struvite stone(स्ट्रूवाइट स्टोन)– इस प्रकार की पथरी ज्यादातर यूटीआई(Urinary tract  infection/मूत्र पथ संक्रमण) से पीड़ित महिलाओं में पायी जाती है. ये पथरी बड़ी हो सकती हैं और आपके मूत्र में बाधा पैदा कर सकती हैं. इस प्रकार की पथरी गुर्दे के संक्रमण के कारण होती है. बुनियादी संक्रमण का इलाज स्ट्रूवाइट स्टोन के विकास को रोक सकता है.
  4. Cystine stone(सिस्टीन स्टोन)–  इस तरह की पथरी काफी कम पाई जाती है. यह उन सभी पुरुष और महिलाओं में होती है जिन्हें अनुवांशिक विकार सिस्टीनुरिया (Genetic disorder cystinuria) होता है. इस विकार में अमीनो एसिड सिस्टीन द्वारा बनने वाले स्टोन गुर्दे, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय में बनते हैं. इस प्रकार की पथरी में सिस्टीन(एक एसिड जो शरीर में स्वाभाविक रूप से होता है) का रिसाव किडनी से मूत्र में होता है.

गुर्दे में पथरी (Kidney stone) के लक्षण|Kidney stone symptoms in hindi

गुर्दे में पथरी के लक्षणों की बात करें तो इसके कोई खास लक्षण नहीं होते…दरअसल गुर्दे में होने वाली छोटी पथरियां मूत्र के सहारे अपने आप निकल जाती हैं. लेकिन बड़ी पथरी होने पर व्यक्ति को असहनीय दर्द होता है. कई बार तो गुर्दे में पथरी होने का पता ही तब चलता है जब व्यक्ति को इससे असहनीय दर्द होता है. यह दर्द स्टोन के किडनी(गुर्दा) से Ureter/ यूरेटर(मूत्रवाहिनी) में खिसकने से होता है. जैसे-जैसे स्टोन यूरेटर(मूत्रनली) में नीचे बढ़ता जाता है दर्द भी बढ़ता चला जाता है. दर्द तब तक रहता है जब तक कि पथरी Urinary bladder/यूरिनरी ब्लैडर(मूत्राशय) में ना गिर जाए. (Kidney stone symptoms in hindi)

दर्द इस बात पर भी निर्भर करता है कि पथरी किस जगह है और मूत्र पथ(Urinary tract) में उसकी प्रगति क्या है. कई लोगों को जहां पीठ के एक तरफ या फिर पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है. दर्द अचानक होता है और काफी तेज होता है फिर अपने आप धीरे-धीरे कम होने लगता है. गुर्दे की पथरी का दर्द ज्यादातर रात और सुबह होता है क्योंकि इस बीच में कम पेशाब करने के कारण मूत्रवाहिनी संकुचित होती है. (Kidney stone symptoms in hindi)

दर्द के अलावा इसके कुछ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं(Kidney stone symptoms in hindi) जैसे:-

  1. पेशाब करते समय दर्द होना.
  2. मूत्र में खून आना.
  3. लाल, गुलाबी और भूरे रंग की पेशाब आना.
  4. मूत्र में धुंधलापन होना.
  5. पेशाब से असामान्य गंध आना.
  6. बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होना.
  7. एक बार में ठीक से पेशाब ना होना. थोड़ी-थोड़ी पेशाब आना.
  8. उल्टी
  9. मतली
  10. बुखार
  11. ठंड लगना

Kidney stone(गुर्दे की पथरी) के कारण |Kidney stone symptoms in hindi

किडनी में स्टोन (Kidney stone) अर्थात गुर्दे में पथरी बनने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन इसका प्रमुख कारण हैं शरीर में पानी की कमी. जो लोग कम पानी पीते हैं उन्हें किडनी में स्टोन (Kidney stone) होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है. पानी कम पीने के अलावा गुर्दे की पथरी के कई और कारण भी हो सकते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:-

  1. अनुवांशिकता– गुर्दे की पथरी (Kidney stone) का एक कारण अनुवांशिकता भी हो सकता है क्योंकि गुर्दे की पथरी कैल्शियम के अधिक स्तर के कारण होती है और मूत्र में कैल्शियम का उच्च स्तर पीढ़ी दर पीढ़ी पारित हो सकता है, इसके अलावा कुछ अनुवांशिक बीमारियां भी गुर्दे की पथरी (Kidney stone) का कारण बन सकती है.
  2. दवाएं– कुछ दवाएं भी पथरी बनने का कारण हो सकती हैं. जैसे बॉडी बिल्डिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोटीन पाउडर और कैल्शियम सप्लीमेंट किडनी में स्टोन (Kidney stone) की आशंका को बढ़ाते हैं. इससे मूत्र में कैल्शियम का स्तर बढ़ता है. बेहतर होगा कि आप दवाओं की जगह प्राकृतिक रूप से कैल्शियम या प्रोटीन लें.  इसके अलावा किडनी रोग, कैंसर और एचआईवी के लिए ली जा रही दवाओं से भी पथरी बनने का खतरा होता है.
  3. अंतर्निहित बीमारियां– कुछ पुरानी बीमारियां जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस(Cystic fibrosis), रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस(Renal tubular acidosis) और इंफ्लेमेट्री बाउल रोग(Inflammatory bowel disease) भी गुर्दे की पथरी के निर्माण का कारण बन सकती हैं.
  4. खानपान की गलत आदतें– आपकी खानपान की गलत आदतें भी काफी हद तक पथरी के गठन में सहायक हो सकती हैं. इसलिए हेल्दी और संतुलित आहार लें. कोल्ड ड्रिंक पीने से बचें.
  5. भौगोलिक स्थान– सुनने में अटपटा लगेगा लेकिन ये सच है. आपकी रहने की जगह, आसपास का वातावरण, जलवायु भी गुर्दे की पथरी के गठन में अहम भूमिका निभाते हैं. भारत में कुछ जगह पथरी के ज्यादा मामले पाए जाते हैं जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में गुर्दे में पथरी की समस्या काफी पाई जाती है. गर्म जलवायु और अपर्याप्त द्रव्य सेवन पथरी होने का कारण हो सकती है.

गुर्दे की पथरी(Kidney stone) का इलाज |Kidney stone symptoms in hindi

गुर्दे की पथरी (Kidney stone) का इलाज उसकी स्थिति पर निर्भर करता है. स्टोन कितना बड़ा है या छोटा है उसी आधार पर उसका इलाज किया जाता है. डॉक्टर सबसे पहले पथरी का आकार देखते हैं अगर पथरी आधा सेंटीमीटर से छोटी है तो डॉक्टर कुछ दवाएं देते हैं और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह देते हैं जिससे कि पथरी अपने आप ही निकल जाती है. दवाओं में टैमसुलोसिन(Tamsulosin), सिलोडोसिन(Silodosin) आदि दी जाती हैं. इन दवाओं से पेशाब की नली थोड़ी चौड़ी हो जाती हैं जिससे छोटे-छोटे स्टोन अपने आप निकल जाते हैं. इसके अलावा दर्द से राहत के लिए भी कुछ दवाएं दी जाती हैं.

  1. लिथोट्रिप्सी(Lithotripsy)– इलाज की यह प्रक्रिया बड़ी पथरी के खात्मे के लिए अपनाई जाती है.  इसमें बड़ी पथरी को तोड़ने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है.जिससे कि वह आपकी मूत्रवाहिनी से मूत्राशय में जा सकें. यह प्रक्रिया आपको असहजता का एहसास करा सकती है इसलिए इसमें व्यक्ति को एनेस्थीसिया दिया जाता है. इसके परिणाम अनुसार पेट के निचले हिस्से और पीठ पर नील हो सकते हैं और गुर्दे व आसपास के अंगों के चारों ओर खून का रिसाव हो सकता है.
  2. परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (Percutaneous Nephrolithotomy)- पथरी को हटाने की यह प्रक्रिया निम्नलिखित स्थिति में अपनाई जाती है-
  • जब पथरी बाधा और संक्रमण करती है या गुर्दों को नुकसान पहुंचाती है.
  • पथरी इतनी बड़ी हो गई है कि पारित नहीं की जा सकती.
  • दर्द को दवाओं से नियंत्रित नहीं किया जा सकता.

इस प्रक्रिया में पथरी को आपकी पीठ में एक छोटे से चीरे के माध्यम से हटाया जाता है.

3. यूरेटेरोस्कोपी(Uretroscopy)

यह तरीका तब अपनाया जाता है जब पथरी आपकी मूत्रवाहिनी या मूत्राशय में फंस जाती है. इसमें डॉक्टर एक उपकरण का उपयोग करते हैं जिसे यूरेट्रोस्कोप कहा जाता है. इसमें एक छोटी सी तार जिस पर कैमरा लगा होता है मूत्रमार्ग में डाला जाता है यह मूत्राशय में जाता है.

गुर्दे की पथरी (Kidney stone) का बचाव |Kidney stone symptoms in hindi

गुर्दे की पथरी (Kidney stone) से खुद को बचाने के लिए आप निम्नलिखित तरीके अपना सकते हैं:-

  1. ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. अपने शरीर को हमेशा हाइड्रेटेड रखें. नींबू पानी और संतरे के जूस का सेवन करें.
  2. अपनी उम्र के हिसाब से कैल्शियम लें. प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से कैल्शियम प्राप्त करें. कैल्शियम सप्लीमेंट्स से पथरी बन सकती है.
  3. पथरी बनाने वाले खाद्य पदार्थ से दूरी रखें जैसे चुकंदर, चॉकलेट, पालक, चाय और अधिकांश मेवों में ऑक्सलेट होता और कोला में फॉस्फेट होता है. ये दोनों ही पथरी का गठन करते हैं.
  4. सोडियम कम मात्रा में लें- उच्च सोडियम आहार ना खाएं. यह गुर्दे की पथरी कर सकता है. इससे मूत्र में कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है.
  5. पशु प्रोटीन कम लें- मांसाहारी भोजन से बचें. रेड मीट, मुर्गी, अंडे और समुद्री भोजन जैसे खाद्य पदार्थ खाने से यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है जिससे गुर्दे की पथरी (Kidney stone) होने की संभावना होती है.

गुर्दे की पथरी (Kidney stone) से बचाव के कुछ घरेलू उपाय |Kidney stone symptoms in hindi

कुछ घरेलू उपायों की मदद से भी आप इस समस्या से राहत पा सकते हैं. ये उपाय निम्नलिखित हैं:-

  1. सेब का सिरका– सेब के सिरके को किडनी के लिए सुपरफुड कहा जाता है. यह किडनी को साफ करने का काम करता है. सेब के सिरके में मौजूद रासायनिक तत्व पथरी को नरम कर बाहर निकालने का काम करते हैं. इसके लिए दो बड़े चम्मच सेब के सिरके को एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं . प्रतिदिन भोजन से पहले इसे पिएं. ये देसी इलाज ना सिर्फ वर्तमान में आपको किडनी स्टोन की समस्या से राहत दिलाएगा बल्कि भविष्य में भी आपको पथरी से बचाएगा. रक्तचाप और मधुमेह(Diabetes) की दवा खा रहे मरीज इसका सेवन ना करें.
  2. नींबू और जैतून तेल– एक बड़े चम्मच जैतून के तेल और एक बड़ा चम्मच नींबू का रस 60 से 80 मिलीलीटर पानी में मिलाकर पिएं . समस्या गंभीर है तो इसे एक दिन में दो से तीन बार ले सकते हैं. इससे आपको काफी फायदा मिलेगा. नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड और जैतून तेल की चिकनाई गुर्दे की पथरी को बाहर निकालने में मदद करते हैं.
  3. अनार का जूस– अनार कई औषधीय गुणों से भरपूर है. अनार का जूस पथरी की दवा के रूप में काम करता है. यह नेफ्रोटोक्सिटी(किडनी में होने वाली विषाक्तता) से बचाव करता है. इसका नियमित सेवन किडनी स्टोन (Kidney stone) को बाहर निकालने में मदद कर सकता है.
  4. तुलसी– गुणों का खजाना कही जाने वाली तुलसी की आयुर्वेद में अपनी एक खास जगह है. तुलसी का सेवन पथरी की समस्या से भी काफी हद तक राहत दिला सकता है. पांच-छह तुलसी की पत्तियों को 10 मिनट के लिए गर्म पानी में डुबो दें फिर इसमें स्वादानुसार शहद मिलाएं और इस मिश्रण को पिएं.
  5. नारियल पानी– नारियल पानी का सेवन भी गुर्दे में पथरी की समस्या के लिए काफी कारगार उपाय माना जाता है. नारियल पानी पीने से मूत्र की मात्रा बढ़ती है और पथरी के आसानी से बाहर निकलने की संभावना रहती है.

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